सख़्त नक़ल विरोधी क़ानून जैसे करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर गंभीर चर्चा करने के बजाय राहुल गांधी ने एक बार फिर अपनी ओछी भाषा और संकीर्ण मानसिकता का परिचय दिया है।

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लोकतंत्र के मंदिर संसद में ‘इडियट’ और देश के करोड़ों लोगों के लिए ‘अंधभक्त’ जैसे शब्दों का प्रयोग संसदीय मर्यादा और जनादेश का खुला अपमान है। विपक्ष का धर्म सरकार से सवाल पूछना है, लेकिन व्यक्तिगत अपमान, अहंकार और अभद्र भाषा किसी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि की पहचान नहीं हो सकती। देश की जनता ऐसे गैर-जिम्मेदार और लोकतंत्र का अपमान करने वाले आचरण का उचित जवाब देना जानती है।

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